Navratri 4th Day: मां कूष्मांडा की पूजा-आराधना का दिन आज, दुख और दरिद्रता से मिलता है छुटकारा, जानिए माता का स्वरूप, भोग, मंत्र और आरती

Navratri 4th Day

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Shardiya Navratri 2025 Day 4: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने से व्यक्ति को हर तरह के कष्टों से छुटकारा मिल जाता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है…

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से हो चुकी हैं… इस दौरान आदि शक्ति के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा की जाती है… आज नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां कुष्मांडा देवी की आराधना की जाती है…. मां कुष्मांडा की पूजा करने से व्यक्ति हर तरह के दुख-दरिद्रता से छुटकारा मिल जाता है… माना जाता है कि मां कुष्मांडा ने सृष्टि की रचना की थी… कुष्मांडा एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है कुम्हड़ा यानी पेठा की बलि देना… ज्योतिष में मां कुष्मांडा का संबध बुध ग्रह से है…  इसलिए माता का ये रूप बुद्धि का वरदान देती हैं। मान्यता है कि इस दिन मां दुर्गा के इस रूप की पूजा करने से बुध ग्रह कुंडली में सकारात्मक रहता है…

मां कुष्मांडा का स्वरूप

मां कुष्मांडा की आठ भुजाएं है…इसी कारण उन्हें अष्टभुजा भी कहते हैं… मां कुष्मांडा के नाम से जाना जाता है….आपको बता दें कि मां के एक हाथ में जपमाला और अन्य सात हाथों में धनुष, बाण, कमंडल, कमल, अमृत पूर्ण कलश, चक्र और गदा शामिल हैं..

मां कुष्मांडा का भोग

मां कूष्मांडा की पूजा में विशेष रूप से पीले रंग का केसर वाला पेठा चढ़ाना शुभ माना जाता है… इसके अलावा मालपुआ और बताशे भी मां कुष्मांडा को भोग के रूप में अर्पित किए जाते हैं… 

मां कुष्मांडा की स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कुष्मांडा की प्रार्थना

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

मां कूष्मांडा बीज मंत्र

ऐं ह्री देव्यै नम:

मां ​कूष्मांडा की आरती (Maa Kushmanda Ki Aarti)

कुष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे।
सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

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