BJP’s guide for Mission Bihar :
नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर NDA में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो गया है. इसमें बीजेपी 101, जेडीयू 101, चिराग की पार्टी 29, मांझी की पार्टी 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. सीट बंटवारे में धर्मेंद्र प्रधान(Dharmendra Pradhan) की भूमिका बेहद अहम रही है. दिल्ली में देर रात चली बैठकों में धर्मेंद्र प्रधान ने चिराग पासवान(Chirag Paswan) और अन्य सहयोगियों के बीच सहमति बनवाई.
NDA ने #BiharElections2025 के लिए सीटों के बंटवारे की घोषणा की।
भाजपा– 101 सीट
जदयू– 101 सीट
LJP(रामविलास)– 29 सीट
राष्ट्रीय लोक मोर्चा– 06 सीट
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM)– 06 सीट https://t.co/Ilc4OLkGwC pic.twitter.com/4FMqxTMl5k— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 12, 2025
कई दौर की बातचीत के बाद धर्मेंद्र प्रधान और भाजपा महासचिव विनोद तावड़े गतिरोध तोड़ने के लिए Chirag Paswan के आवास पर गए. हालांकि बैठक बेनतीजा रही. कुछ ही घंटों में चिराग ने अपने करीबी सांसद अरुण भारती को सीटों पर बातचीत के लिए आधिकारिक वार्ताकार नियुक्त कर दिया. ये कदम दोनों दलों के बीच बढ़ते तनाव का संकेत माना गया.

देर रात हुई बातचीत के बाद बनी बात
ये गतिरोध तब तक जारी रहा, जब तक केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने हस्तक्षेप कर चिराग पासवान से भाजपा के 25 सीटों वाले फॉर्मूले को मानने की अपील नहीं की,लेकिन चिराग अपने रुख पर कायम रहे. इसके बाद चिराग के आवास पर देर रात हुई बैठक ने पूरे समीकरण को बदल दिया.
हम एनडीए (NDA) परिवार ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सीटों का बंटवारा पूरा किया है।
🔹 BJP : 101
🔹 JDU : 101
🔹 LJP (R) : 29
🔹 RLM : 06
🔹 HAM : 06बिहार है तैयार —
फिर से NDA सरकार,
इस बार पूरे दम के साथ #BiharFirstBihariFirst के साथ!#NDA…— युवा बिहारी चिराग पासवान (@iChiragPaswan) October 12, 2025
सूत्रों का कहना है कि लंबी चर्चा के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने चिराग को 29 सीटों के अंतिम समझौते पर सहमत होने के लिए मना लिया. बैठक समाप्त होते ही दोनों नेता मुस्कुराते और हाथ मिलाते हुए देखे गए, जो बिहार चुनाव से पहले एनडीए की सबसे अहम बातचीतों में से एक के सफल अंत का संकेत था.
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इस सहज समझौते के पीछे धर्मेंद्र प्रधान का हाथ था, जो एक रणनीतिकार हैं और अपने शांत स्वभाव और तीक्ष्ण राजनीतिक सूझबूझ के लिए जाने जाते हैं.बिहार चुनाव के लिए भाजपा के प्रभारी बनाए गए धर्मेंद्र प्रधान की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ समन्वय तक सीमित नहीं है. वे पार्टी के भरोसेमंद क्राइसिस मैनेजर हैं, जिन्हें अक्सर तब मैदान में उतारा जाता है, जब हालात जटिल हों. बिहार की राजनीति में उनका अनुभव लंबा और असरदार रहा है. बिहार में 2010 में एनडीए की भारी जीत (243 में से 206 सीटें) की पटकथा लिखने से लेकर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (40 में से 31 सीटें) तक, बिहार के चुनावी मानचित्र पर प्रधान की छाप स्पष्ट देखी जा सकती है.
धर्मेंद्र प्रधान के नाम कई राज्यों के रिकॉर्ड…
उत्तर प्रदेश (2022): भाजपा की लगातार दूसरी बार जीत सुनिश्चित की.
हरियाणा (2024): एंटी-इंकंबेंसी के बावजूद तीसरी बार बीजेपी की सरकार बनवाई.
उत्तराखंड (2017): पार्टी को सत्ता में वापस लाने में अहम भूमिका.
पश्चिम बंगाल (2021): नंदीग्राम पर खास फोकस, जहां ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा.
ओडिशा: जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत कर भविष्य की जीत की नींव रखी.

BJP के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार Dharmendra Pradhan…
धर्मेंद्र प्रधान की असली ताकत उनके संगठन-निर्माण कौशल, सहज लेकिन प्रभावी बातचीत शैली और बिना किसी शोर-शराबे के गतिरोध सुलझाने की क्षमता में छिपी है. यही गुण उन्हें जटिल गठबंधनों और सूक्ष्म राजनीतिक समीकरणों के बीच भाजपा का सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार बनाते हैं.
#WATCH पटना (बिहार): केंद्रीय मंत्री और HAM-S नेता जीतन राम मांझी ने सीट बंटवारे की घोषणा पर कहा,"…6 सीट हमें मिली है तो ये आलाकमान का निर्णय है इसे हम स्वीकार करते हैं…हमें जो मिला है उससे हम संतुष्ट हैं हमें कोई शिकायत नहीं है।" https://t.co/8NDJlKZXjj pic.twitter.com/edTpLQG1fI
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 12, 2025
जैसे-जैसे बिहार अब चुनावों की ओर बढ़ रहा है, ‘डबल इंजन सरकार’ को एकजुट रखने और एनडीए को एक दिशा में आगे ले जाने की ज़िम्मेदारी में धर्मेंद्र प्रधान की रणनीतिक चतुराई और भरोसेमंद छवि निर्णायक साबित हो सकती है. भाजपा के लिए वे न सिर्फ़ संगठन की रीढ़ हैं, बल्कि वह उसकी ‘विजयी रणनीति’ का विश्वसनीय चेहरा भी बने हुए हैं.
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